गुरुवार, 29 जनवरी 2009

पुकार

बस गान तेरा ही करुँ

पथ भरा हो तिमिर से या रश्मियों से
हो भरा वह कंटकों से या सुमन से
जो तुम्हारे द्वार तक ले जाए मुझको
बस यही वरदान दो कि मैं सदा उस पंथ पर ही पग धरूँ
बस गान तेरा ही करुँ

तीब्र लहरें हों भले या शांत धारा
दीखता हो दूर कितना ही किनारा
आ रही हो रश्मि तेरी जिस दिशा से
बस यही वर दो उधर ही मैं सदा नाव अपनी ले चलूँ
बस गान तेरा ही करुँ

नीद में होऊं भले या चेतना में
हर्ष में होऊं भले या वेदना में
एक पल भी भूल पाऊं ना तुम्हे
बस यही कर दो सदा ही मैं तुम्हारा हर घड़ी सुमिरन करुँ
बस गान तेरा ही करुँ

खींचती हैं ओर अपनी वासनायें
दंभ भी फुंफकारता है फन उठाये
बिद्ध हूँ मैं पाश में माया जगत के
बन्ध सारे काट दो कि मैं सदा बस ध्यान तुम पर ही धरूँ
बस गान तेरा ही करुँ

12 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत ही उम्दा व भावपूर्ण रचना है।बधाई।

    बहुत सुन्दर लिखा है-

    तीब्र लहरें हों भले या शांत धारा
    दीखता हो दूर कितना ही किनारा
    आ रही हो रश्मि तेरी जिस दिशा से
    बस यही वर दो उधर ही मैं सदा
    नाव अपनी ले चलूँ
    बस गान तेरा ही करुँ

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  2. नीद में होऊं भले या चेतना में
    हर्ष में होऊं भले या वेदना में
    एक पल भी भूल पाऊं ना तुम्हे
    बस यही कर दो सदा ही मैं तुम्हारा
    हर घड़ी सुमिरन करुँ
    बस गान तेरा ही करुँ
    -अति -अति सुंदर !!!!!!
    http://paharibaba.blogspot.com

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  3. bouth he aacha post kiyaa aaapne yar

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  4. भाव और विचार के श्रेष्ठ समन्वय से अभिव्यक्ति प्रखर हो गई है । विषय का विवेचन अच्छा किया है । भाषिक पक्ष भी बेहतर है । बहुत अच्छा लिखा है आपने ।
    मैने अपने ब्लाग पर एक लेख लिखा है-आत्मविश्वास के सहारे जीतें जिंदगी की जंग-समय हो तो पढें और कमेंट भी दें-

    http://www.ashokvichar.blogspot.com

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  5. harsh me hooon yaa vedna me ek pal bhi bhool paaoon naa bahut hi sunder bhavan hai aisa ho jaaye to dukh sukh sab sam ho jaayen yahi jeevan ki safalta hai badhaai

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  6. इस टिप्पणी को लेखक द्वारा हटा दिया गया है.

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  7. बहुत बढ़िया,
    भावपूर्ण, सशक्त रचना एवं श्रेष्ठ शब्दों का समन्वय कर शब्दों की अभिव्यक्ति काबिले तारीफ़!
    मन में शान्ति सी छा गई हैं, बहुत खूब, लाजवाब प्रस्तुतीकरण! और क्या कहूँ, तारीफ़ के लिए शब्द ही नही हैं!
    हमारी यही कामना हैं कि इसी तरह आप अपनी लेखनी से हम ब्लॉग भाइयों में संवेदना का संचार करते रहें!
    इसी अपेक्षा के साथ!
    सस्नेह!
    दिलीप गौड़
    गांधीधाम

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  8. समग्र समर्पण ! सुंदर आत्मनिवेदन !

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  9. वाहवा.... बेहतरीन कविता है.... आपको बधाई...

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  10. bhaav, sdbhaav, nishtha, aur lagan se paripoorn
    bahot hi sundar abhvyaktee.......
    vichaaron ko paavantaa baandhe rakhti hai, aur mn prarthna mei leen hone ko kartaa hai...!
    badhaaee...!!
    ---MUFLIS---

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  11. Pratap ji,
    bahut achchhe bhavon valee sundar rachna.badhai.

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  12. bhaw,prawah aur shabd chayan sab uttam . badhaII .

    ramesh joshi av

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