शुक्रवार, 30 अक्तूबर 2009

दोहे

जो माटी से तन बना, महता कम ना होत
बिन दीया कैसे भला, जलती कोई जोत

पोथी सब कंठस्थ, पर, खुली न मन की गाँठ
नलिका* पर लटका हुआ, तोता करता पाठ

मिलन विरह दोनों सुखद, प्रेम करे यदि वास
कस्तूरी सा, हृदय में, फैले मधुर सुवास

सुलगे भुस तो देर तक, धुँआ भरे आकास
तिनका जलता एक पल, देता अग्नि, उजास

मसिहा बनने की रही, सदा मनुज की चाह
पर सबसे बनती नहीं, पानी ऊपर राह

रात दिवस लड़ता, मगर, पार कभी ना पाय
चक्रव्यूह गढ़ आप ही, ढूँढे स्वयं उपाय

आधिपत्य, प्रतिदान, गुण, होते नहि आधार
इसीलिए सबसे विलग, होता माँ का प्यार

मृत्यु भले ही जगत में, सबका अंतिम सत्य
मरण नहीं जीवन बिना , जीवन पहला सत्य

*नलिका पर.....----- (कदाचित कुछ लोगों को यह सन्दर्भ न ज्ञात हो) पहले के ज़माने में तोता पकड़ने के लिए नलिका लगाते थे। जब तोता उस पर बैठता था तो नलिका घूम जाती थी और तोता उल्टा लटक जाता था. वह गिर न पड़े इस डर से नलिका को और जोर से पकड़ लेता था. और बहेलिया आकर उसे पकड़ लेता था. एक बार एक साधु ने एक तोता पाला और उसे पकडे जाने से बचने का उपाय बताया -
१। नलिका पर कभी मत बैठना
२। अगर बैठ भी जाना तो नलिका जैसे ही घूमे उसे छोड़कर उड़ जाना।
तोते ने रट तो लिया लेकिन समझ न सका और एक दिन नलिका पर जाकर बैठ गया। नलिका घूमी और वह उलटा लटक गया. नलिका को जोर से पकड़कर पाठ दुहराने लगा -- १. नलिका पर कभी मत बैठना २. अगर बैठ भी जाना तो नलिका जैसे ही घूमे उसे छोड़कर उड़ जाना.

7 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर दोहे हैं।बधाई स्वीकारें।

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  2. मृत्यु भले ही जगत में, सबका अंतिम सत्य
    मरण नहीं जीवन बिना , जीवन पहला सत्य
    सत्य वचन ...
    नलिका पर उल्टे लटके तोते की व्याख्या का आभार ...

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  3. मिलन विरह दोनों सुखद, प्रेम करे यदि वास
    कस्तूरी सा, हृदय में, फैले मधुर सुवास !!!

    Bahut bahut sundar prernadayi shikshaprad dohe....

    Bada satik prasang uthaya aapne...achchi baton ko ratne bhar se nahi hota use aacharan me bhi utarna padta hai tabhi wah sarthak hota hai...

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