मंगलवार, 24 फ़रवरी 2009

कौन सा सच खोजते हो ?

जन्म की पहली किरण से , देह के अवसान तक
खींचता है चल रहा वह सृष्टि का रथ अनवरत
हर्ष में हो उल्लसित और वेदना में हो व्यथित
डोर थामे साँस की चलता मनुज का काफिला
यह सत् नही तो क्या भला ?

मोहती मन प्राण को शिशु की मधुर किलकारियाँ
राग भरतीं सरस, मन में प्रिय नयन की बोलियाँ
रागिनी को साँस में भर , हर्ष से उन्मत्त हो
तीर है चंचल सरित के गीत गाता बाँवरा
यह शिव नही तो क्या भला ?

पूर्व नभ में प्रस्फुटित होती मनोरम अरुणिमा
अमराइओं में पत्र से छनती मही पर चन्द्रिका
पुष्प पल्लव पुष्करिणीयां विविध रंगी बहु लता
मेदिनी के वक्ष पर ये लहलहाती हरीतिमा
सुन्दर नहीं तो क्या भला ?

कौन सा सत् , कौन सा शिव और सुन्दर कौन सा
खोजते हो मध्य- वन , गिरि कंदराओं ,गढ़ शिला
क्यों अधिक निष्ठा तुम्हारी मृत्यु में, निर्वाण में
हो नहीं जीवन जगत में और माया, तो कहो
अस्तित्व उनका क्या भला ?

जनमता मरता रहा है जीव सदियों से यहाँ
किंतु शाश्वत सत्य सा जीवन सतत चलता रहा
अवतरित होते रहे हैं देव जीवन केलिए
कोई सिखलाती नहीं गीता , पलायन , विमुखता
बस कर्म ही सबसे बड़ा।

16 टिप्‍पणियां:

  1. कौन सा सत् , कौन सा शिव और सुन्दर कौन सा
    खोजते हो मध्य- वन , गिरि कंदराओं ,गढ़ शिला
    क्यों अधिक निष्ठा तुम्हारी मृत्यु में, निर्वाण में
    हो नहीं जीवन जगत में और माया, तो कहो

    सुन्दर सही बात कही आपने इस रचना के माध्यम से ..हम इस सच को समझ ले तो मुश्किल ही नहीं हो

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  2. खोजने की क्या जरूरत. अपना कर्म किये जाओ. सही कहा है. आभार.

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  3. वाह !!!
    सत्यम शिवम् सुन्दरम की इतनी सुन्दर व्याख्या पढ़ मन मुग्ध हो गया.........
    जितने सुन्दर भाव हैं उतनी ही सुन्दर अभिव्यक्ति और उतनी ही सुन्दर शिक्षा......वाह !!
    अतिसुन्दर कविता...

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  4. जनमता मरता रहा है जीव सदियों से यहाँ
    किंतु शाश्वत सत्य सा जीवन सतत चलता रहा
    अवतरित होते रहे हैं देव जीवन केलिए
    कोइ सिखलाती नहीं गीता , पलायन , विमुखता
    बस कर्म ही सबसे बड़ा......ek sikcha prad kavita...!

    बस कर्म ही सबसे बड़ा...yahi satya hai..karam agar acche karege to fal nischi accha hi hoga...bhot sunder bhav...BDHAI..!!

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  5. कितनी सुंदर बातें कही है ... अच्‍छी रचना।

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  6. बस कर्म ही सबसे बड़ा
    man jab ye seekhne mein kaamyaab ho jaata hai to samjho naya jeevan paa leta hai |
    aapkee bhaasha , abhivyakti shaandar hai |
    lagta hai hindi saahitay mein chhapenge |
    best wishes

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  7. बहुत ही सुन्दर भाव हैं।बहुत अच्छी रचना है।बधाई।

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  8. जनमता मरता रहा है जीव सदियों से यहाँ
    किंतु शाश्वत सत्य सा जीवन सतत चलता रहा
    अवतरित होते रहे हैं देव जीवन केलिए
    कोइ सिखलाती नहीं गीता , पलायन , विमुखता
    बस कर्म ही सबसे बड़ा......

    bahut sunder bhav, bahut sunder shabd chayan,uncha adhyatmik star darshati anupam rachna.

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  9. मोहती मन प्राण को शिशु की मधुर किलकारियाँ
    राग भरते सरस, मन में प्रिय नयन की बोलियाँ
    रागिनी को साँस में भर , हर्ष से उन्मत्त हो
    तीर है चंचल सरित के गीत गाता बाँवरा
    यह शिव नही तो क्या भला ?
    बहुत ही सुन्दर भाव हैं

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  10. कौन सा सत् , कौन सा शिव और सुन्दर कौन सा
    खोजते हो मध्य- वन , गिरि कंदराओं ,गढ़ शिला
    क्यों अधिक निष्ठा तुम्हारी मृत्यु में, निर्वाण में
    हो नहीं जीवन जगत में और माया, तो कहो
    अस्तित्व उनका क्या भला ?.....
    atulniye rachna

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  11. कौन सा सत् , कौन सा शिव और सुन्दर कौन सा
    खोजते हो मध्य- वन , गिरि कंदराओं ,गढ़ शिला
    क्यों अधिक निष्ठा तुम्हारी मृत्यु में, निर्वाण में
    हो नहीं जीवन जगत में और माया, तो कहो

    सत्यम, शिवम् और सुन्दरम को सुन्दर तरीके से संजोती भाव पूर्ण कविता.
    जैसे स्वयं को खोजते हुवे, बहुत सुन्दर भाव है इसमें

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  12. जनमता मरता रहा है जीव सदियों से यहाँ
    किंतु शाश्वत सत्य सा जीवन सतत चलता रहा
    ... प्रभावशाली अभिव्यक्ति!!!

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