सोमवार, 21 नवंबर 2011

तुम मेरा प्यार हो.....

तुम मेरा प्यार हो.....

तरुणाई के स्वप्नों की मिठास हो
उषा की पहली किरन की उजास हो
मेरे प्रभात-वंदन का स्वर हो
अर्घ्य-पुष्प-चन्दन की सुवास हो

शिवाला के घंटों का अनुनाद हो
मेरी प्रार्थना का संवाद हो
आरती की ज्योति हो
जलार्पण की धार हो
तुम मेरा प्यार हो.

नीम की शाखों पर गौरैयों का गान
गंगा की लहरों पर किरणों का नृत्य हो
मेघ की तूलिका से अम्बर पर उभरा
मेरी कल्पनाओं का चित्र हो

साँझ के आँचल में पलती अस्फुट चाह हो
अंतिम प्रहर की ठंडी बयार हो
शरद के धूप की गुनगुनाहट हो
सावन की पहली फुहार हो
तुम मेरा प्यार हो

प्रथम बेला की पहली कामना हो
मेरे सर्व सुख की सकल साधना हो
मेरे हर आरोहण का अवलम्ब हो
मेरे हर अवरोहण की सांत्वना हो

मेरे सूक्ष्म का चिंतन हो
मेरे स्थूल का आलिंगन हो
मेरी भौतिकता की पूर्ण प्राप्ति हो
मेरी आध्यात्मिकता का चिरंतर आधार हो
तुम मेरा प्यार हो.

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