मंगलवार, 6 दिसंबर 2011

नई बात

कभी हाथों के बल चलते हुए आदमी को देखा होगा
तमाशबीनो से घिरे वृत्त के भीतर
उसके चक्कर पूरा करने पर
तालियाँ पीटते हुए एक सिक्का भी फेंका होगा।

कभी कभी उल्टी बातें भी अच्छी लगती हैं
किन्तु,
सिर्फ कुछ देर रुक कर
भीड़ में खड़े हो जाने के लिए।
कुछ देर,
नएपन से अचंभित होकर तालियाँ बजाने के लिए.

वह आदमी
जब हाथों के बल चलता है
बस तमाशबीनो से घिरे वृत्त में गोल गोल घूमता है.
कभी भी
कोई दूरी नहीं तय कर पाता है
और
एक गाँव से दूसरे गाँव तक
पैरों से ही चल कर जाता है.

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